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Dawat Hi Deen Hai
दावत का मकसद अल्लाह की मखलूक को इस्लाम और उसके रसूल ﷺ के पैगाम की तरफ बुलाना है, बे खबरों को बाखबर करना, बा खबरों को मनवाना, मानने वालों को अमल की तरगीब देना, बुराइयों से रोकना और भलाई पर आमादा करना सब दावत और तबलीग में दाखिल है, और यही उम्मते मुस्लिमा का मकसद और उसकी पैदाइश का हेतु है, अल्लाह पाक का इरशाद है: "तुम ए मुसलमानो! बेहतरीन उम्मत हो जो लोगों के लिए जाहिर की गई, अच्छे कामों को बताते हो और बुरे कामों से रोकते हो." इस आयत से चंद आयत पहले यह वज़ाहत है कि हर दौर में मुसलमान उम्मत पर फर्ज़े किफाया है कि उसकी एक जमात इस काम में लगी रहे, और अगर दावत का काम पूरी उम्मत छोड़ दे तो सारी उम्मत गुनहगार होगी। चुनांचे अल्लाह पाक का फरमान है: और चाहिए के तुम में एक जमात ऐसी हो जो लोगों को नेकी की दावत देती रहे, और अच्छे कामों की तालीम देती और बुरी बातों से रोकती रहे, यही वह लोग हैं जो कामयाब होने वाले हैं। इसका अमली सुबूत रसूले अकरम ﷺ की ना सिर्फ मक्का की जिंदगी बल्कि आप ﷺ की पूरी जिंदगी से मिलता है..
यानी इस उममत के लिए असल दीन ही दावत ए तबलीग है ❤️❤️❤️❤️❤️❤️🕋🕋
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जामा मस्जिद में दावत ए तबलीग़ के जोड़ में पूरी उममत के लिए दुआ
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